kuber · aarti

कुबेर आरती

श्री कुबेर जी आरती (Shri Kuber Ji Aarti)- ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे , स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे। शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे॥ ऊँ..॥

धन के देवता कुबेर
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स (कुबेर)

कुबेर आरती को अपनी दैनिक पूजा का हिस्सा बनाकर श्रद्धा से पाठें।

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दीप जलाकर श्रद्धा से देवता के समक्ष यह आरती गाएँ।

आरती के बोल

ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे , स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे।

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े, स्वामी भक्त कुबेर बड़े ।

स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे,स्वामी सिर पर छत्र फिरे ।

गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे ।

भांति भांति के व्यंजन बहुत बने, स्वामी व्यंजन बहुत बने।

बल बुद्धि विद्या दाता, हम तेरी शरण पड़े,

मुकुट मणी की शोभा, मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले।

यक्ष कुबेर जी की आरती ,जो कोई नर गावे,स्वामी जो कोई नर गावे ।

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