krishna · bhajan
जय श्री वल्लभ, जय श्री विट्ठल — श्रीनाथजी भजन
पुष्टिमार्ग कीर्तन जो वल्लभ, विट्ठल, यमुना और श्रीनाथजी का जयघोष करता है — दर्शन और जन्माष्टमी सभा में गाया जाता है।

श्रीनाथजी या कृष्ण की छवि के समक्ष खड़े हों। टेक पर ताली स्थिर रखें, फिर अष्टछाप नामों को शांत स्वर में उठाएँ।
यह कीर्तन अभिवादन है, प्रदर्शन नहीं। कृष्ण आरती के बाद आरंभिक दोहा दो बार गाएँ, फिर गोकुल, गोवर्धन और वल्लभ कुल के नाम उसी स्नेह से लें जो हवेली दर्शन में होता है।
भजन के बोल
जय श्री वल्लभ, जय श्री विट्ठल, जय यमुना श्रीनाथ जी
कलियुग का तो जीव उद्धार्या, मस्तक धरिया हाथ जी
मोर मुकुट और काने कुण्डल, उर वैजयन्ती माला जी
नासिका गज मोती सोहे, ए छबि जोवा जइये जी
आसपास तो गऊ बिराजे, गवाल मण्डली साथे जी
मुख थी व्हालो वेणु बजावे, ए छबि जोवा जइये जी
वल्लभ दुर्लभ जग में गाये, तो भवसागर तर जायें जी
माधवदास तो इतना मांगें, जन्म गोकुल में पाएं जी
जय श्री गिरिधर, जय श्री गोविन्द, जय श्री बालकृष्ण जी
जय श्री गोकुलपते, जय श्री रघुपति, जय श्री यदुपति, जय श्री घनश्याम जी
श्री गोकुलवारे नाथ जी, मेरी डोर तुम्हारे नाथ जी
जय यमुना श्री गोवर्धन नाथ, महाप्रभु श्री विट्ठलनाथ
जय जय श्री गोकुलेश, शेष ना रहे क्लेश
श्री वल्लभ जुग जुग राज करो, श्री विट्ठल जुग जुग राज करो
श्री वल्लभ विट्ठल गोपीनाथ, देवकी नन्दन श्री रघुनाथ
श्री यशोदानन्दन नन्दकिशोर, श्री मुरलीधर माखनचोर
सूरदास कृष्णदास जी, परमानन्ददास कुंभन दास जी
चतुर्भुज नन्ददास जी, छीतस्वामी श्री गोविन्द जी
श्री वल्लभ देव की जय, प्राणप्यारे की जय
श्री गोवर्धन नाथ की जय, चौरासी वैष्णव की जय
दो सौ बावन भगवदीयन की जय, अष्टसखान की जय
समस्त वल्लभकुल की जय, समस्त वैष्णवन की जय
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- यह कीर्तन कब गाया जाता है?
- प्रातः या संध्या श्रीनाथजी दर्शन पर, और जन्माष्टमी भर। घर की सभा में कृष्ण आरती के साथ गाएँ।
- इसके साथ कौन सी आरती और चालीसा पढ़ें?
- कृष्ण आरती और कृष्ण चालीसा बैठक पूरी करते हैं। शांत एकादशी संध्या पर विष्णु आरती उपयुक्त है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
संबंधित लेख

कृष्ण आरती — आरती कुंजबिहारी की
वृंदावन में भगवान कृष्ण के दिव्य स्वरूप का वर्णन करने वाली प्रिय कुंजबिहारी आरती।
और पढ़ें
कृष्ण चालीसा
Shri krishna Chalisa (श्री कृष्णा चालीसा) बंशी शोभित कर मधुर । नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बफल ।
और पढ़ें
कृष्ण मंत्र
Krishna Mantra: ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।।
और पढ़ें
कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि — अर्धरात्रि गृह पूजा
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की विधि: दिन भर स्मरण, बाल गोपाल का पंचामृत अभिषेक, और निशीत काल में अर्धरात्रि आरती।
और पढ़ें
विष्णु आरती
Shri Vishnu Aarti (श्री विष्णु आरती )- ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥ॐ..॥
और पढ़ें
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं — नाम भजन
अच्युत, केशव, कृष्ण और जानकीवल्लभ का नाम-भजन — राम नवमी, विजयादशमी और सुंदरकाण्ड बैठक में गाया जाता है।
और पढ़ें
छोटे छोटे घुँगरू — हनुमान बाल भजन
छोटे घुँगरू और राम नाम का हनुमान नृत्य-भजन — मंगलवार और हनुमान जयंती पर बच्चों के साथ गाया जाता है।
और पढ़ें