भजन
घर, मंदिर और पर्व सभाओं में गाने योग्य भक्ति गीत
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं — नाम भजन
अच्युत, केशव, कृष्ण और जानकीवल्लभ का नाम-भजन — राम नवमी, विजयादशमी और सुंदरकाण्ड बैठक में गाया जाता है।
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छोटे छोटे घुँगरू — हनुमान बाल भजन
छोटे घुँगरू और राम नाम का हनुमान नृत्य-भजन — मंगलवार और हनुमान जयंती पर बच्चों के साथ गाया जाता है।
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दर्शन दो घनश्याम नाथ — विरह भजन
प्रार्थना-भजन जो घनश्याम से मुखदर्शन और हृदय-दीप माँगता है — संध्या कीर्तन और जन्माष्टमी पर गाया जाता है।
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गौरी नंदन तेरा वंदन — गणेश भजन
आरंभ, चतुर्थी और बिना रुकावट खुलने वाले कार्य हेतु प्रथम पूज्य गणेश भजन।
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गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय — नाम कीर्तन
क्लासिक नाम-कीर्तन जो गोविन्द, गोपाल और देव-परिवार का जयघोष करता है — नित्य और जन्माष्टमी पर गाया जाता है।
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हे प्रभु आनंद-दाता — प्रातः ज्ञान प्रार्थना
कक्षा और घर की प्रार्थना जो ज्ञान, स्वच्छ वाणी और गुरु-सेवा माँगती है — उषा और गुरु पूर्णिमा पर गाई जाती है।
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हे शम्भू बाबा मेरे भोले नाथ — शिव भजन
बेल, चरण-धूल और तीन लोक का सरल शिव कीर्तन — सोमवार, श्रावण और महाशिवरात्रि पर गाया जाता है।
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होली खेल रहे बांकेबिहारी — होली भजन
बांकेबिहारी, राधा और गिरते गुलाल का ब्रज होली गीत — होलिका दहन के बाद और अगली सुबह के रंग तक गाया जाता है।
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जय श्री वल्लभ, जय श्री विट्ठल — श्रीनाथजी भजन
पुष्टिमार्ग कीर्तन जो वल्लभ, विट्ठल, यमुना और श्रीनाथजी का जयघोष करता है — दर्शन और जन्माष्टमी सभा में गाया जाता है।
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नंदभवन में उड़ रही धूल — ब्रज रज भजन
ब्रज गीत जो नंद भवन की धूल को तीन लोक के तीर्थों से अधिक प्रिय मानता है — जन्माष्टमी और संध्या कीर्तन में गाया जाता है।
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पायो जी मैंने राम रतन धन पायो — मीराबाई भजन
मीराबाई का भजन उस राम-रत्न धन पर जो खर्च नहीं होता, चोर नहीं लूटता — राम नवमी और संध्या मीरा कीर्तन में गाया जाता है।
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रघुपति राघव राजाराम — राम धुन
रघुपति और सीताराम की प्रिय राम धुन — प्रातः भ्रमण, राम नवमी और एक नाम चाहने वाली किसी भी बैठक में गाई जाती है।
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राम नाम के हीरे मोती — नाम-जप भजन
चलते-चलते नाम का भजन जो राम और श्याम को गली-गली हीरे-मोती की तरह बिखेरता है — राम नवमी और संध्या सत्संग में गाया जाता है।
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वैष्णव जन तो तेने कहिये — नरसिंह मेहता भजन
नरसिंह मेहता का गुजराती भजन उस वैष्णव पर जो दूसरे का दर्द जानता है — एकादशी और किसी भी विष्णु बैठक में गाया जाता है।
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