ram · chalisa

श्री राम चालीसा

श्री राम चालीसा | Shri Ram-Chalisa | Shri Raghuveer Bhakt Hitkari | श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥

ram की मूर्ति
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स

श्री राम चालीसा को अपनी दैनिक पूजा का हिस्सा बनाकर श्रद्धा से पाठें।

श्रद्धा से प्रत्येक छंद पर ध्यान देते हुए पाठ करें। चालीसा का पाठ प्रतिदिन या विशेष अवसरों पर किया जाता है।

चालीसा के छंद

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥

श्री राम चालीसा

दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥२॥

तब भुज दण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥

तुम अनाथ के नाथ गुंसाई। दीनन के हो सदा सहाई॥३॥

ब्रह्मादिक तव पारन पावैं। सदा ईश तुम्हरो यश गावैं॥

चारिउ वेद भरत हैं साखी। तुम भक्तन की लज्जा राखीं॥४॥

गुण गावत शारद मन माहीं। सुरपति ताको पार न पाहीं॥

नाम तुम्हार लेत जो कोई। ता सम धन्य और नहिं होई॥५॥

राम नाम है अपरम्पारा। चारिहु वेदन जाहि पुकारा॥

गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो। तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो॥६॥

शेष रटत नित नाम तुम्हारा। महि को भार शीश पर धारा॥

फूल समान रहत सो भारा। पाव न कोऊ तुम्हरो पारा॥७॥

भरत नाम तुम्हरो उर धारो। तासों कबहुं न रण में हारो॥

नाम शक्षुहन हृदय प्रकाशा। सुमिरत होत शत्रु कर नाशा॥८॥

लखन तुम्हारे आज्ञाकारी। सदा करत सन्तन रखवारी॥

ताते रण जीते नहिं कोई। युद्घ जुरे यमहूं किन होई॥९॥

महालक्ष्मी धर अवतारा। सब विधि करत पाप को छारा॥

सीता राम पुनीता गायो। भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो॥१०॥

घट सों प्रकट भई सो आई। जाको देखत चन्द्र लजाई॥

सो तुमरे नित पांव पलोटत। नवो निद्घि चरणन में लोटत॥११॥

सिद्घि अठारह मंगलकारी। सो तुम पर जावै बलिहारी॥

औरहु जो अनेक प्रभुताई। सो सीतापति तुमहिं बनाई॥१२॥

इच्छा ते कोटिन संसारा। रचत न लागत पल की बारा॥

जो तुम्हे चरणन चित लावै। ताकी मुक्ति अवसि हो जावै॥१३॥

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा। नर्गुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा॥

सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी। सत्य सनातन अन्तर्यामी॥१४॥

सत्य भजन तुम्हरो जो गावै। सो निश्चय चारों फल पावै॥

सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं। तुमने भक्तिहिं सब विधि दीन्हीं॥१५॥

सुनहु राम तुम तात हमारे। तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे॥

तुमहिं देव कुल देव हमारे। तुम गुरु देव प्राण के प्यारे॥१६॥

जो कुछ हो सो तुम ही राजा। जय जय जय प्रभु राखो लाजा॥

राम आत्मा पोषण हारे। जय जय दशरथ राज दुलारे॥१७॥

ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा। नमो नमो जय जगपति भूपा॥

धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा। नाम तुम्हार हरत संतापा॥१८॥

सत्य शुद्घ देवन मुख गाया। बजी दुन्दुभी शंख बजाया॥

सत्य सत्य तुम सत्य सनातन। तुम ही हो हमरे तन मन धन॥१९॥

याको पाठ करे जो कोई। ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥

आवागमन मिटै तिहि केरा। सत्य वचन माने शिर मेरा॥२०॥

और आस मन में जो होई। मनवांछित फल पावे सोई॥

साग पत्र सो भोग लगावै। सो नर सकल सिद्घता पावै॥

अन्त समय रघुबरपुर जाई। जहां जन्म हरि भक्त कहाई॥२२॥

श्री हरिदास कहै अरु गावै। सो बैकुण्ठ धाम को पावै॥२3॥

सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय।

हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाय॥

राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय।

जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्घ हो जाय॥

संबंधित लेख

राम मंदिर की मूर्ति
ramaarti

राम स्तुति — श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन

तुलसीदास द्वारा रचित क्लासिक राम स्तुति, आरती से पहले या बाद में भक्तिपूर्ण स्तुति के रूप में गाई जाती है।

और पढ़ें
देवी बगलामुखी
baglamukhichalisa

बगलामुखी चालीसा

मां बगलामुखी चालीसा हिंदी में पढ़ें। जानें बगलामुखी जयंती 2025 की तिथि, महत्व, पूजा विधि, स्तंभन मंत्र और शत्रु विजय के अचूक उपाय।

और पढ़ें
भैरव की मूर्ति
bhairavchalisa

भैरव चालीसा

Shri Bhairav Chalisa | Shri Bhairav Chalisa Ke Lyrics Hindi | जयति काल भैरव बलकारी।

और पढ़ें
धन्वंतरी, आयुर्वेद के देवता
dhanvantarichalisa

धन्वंतरी चालीसा

Shri Dhanvantari Chalisa (श्री धन्वन्तरि चालीसा)- करूं वंदना गुरू चरण रज, ह्रदय राखी श्री राम।

और पढ़ें
durga की मूर्ति
durgachalisa

दुर्गा चालीसा

श्री दुर्गा चालीसा पाठ (Durga Chalisa): नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

और पढ़ें
ganesh की मूर्ति
ganeshchalisa

गणेश चालीसा

गणेश चालीसा: जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥

और पढ़ें
देवी गायत्री
gayatrichalisa

गायत्री चालीसा

श्री गायत्री चालीसा (Shri Gayatri Chalisa) - ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचंड ॥ शांति कांति जागृत प्रगति रचना शक्ति अखंड ॥

और पढ़ें