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राम स्तुति — श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन

तुलसीदास द्वारा रचित क्लासिक राम स्तुति, आरती से पहले या बाद में भक्तिपूर्ण स्तुति के रूप में गाई जाती है।

राम मंदिर की मूर्ति
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स (राम मंदिर, चरमंगलम)

भगवान राम की छवि के समक्ष हाथ जोड़कर इस स्तुति का पाठ करें। यह अक्सर राम नवमी और दैनिक राम पूजा में गाई जाती है।

गोस्वामी तुलसीदास की यह स्तुति भगवान राम की सबसे प्रिय भजनों में से एक है। भक्ति से पाठ करें, भगवान के प्रत्येक गुण पर ध्यान दें।

स्तुति के बोल

श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन, हरण भवभय दारुणं

नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं

कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं

पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नोमि जनक सुतावरं

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं

रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं

शिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणं

आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं

मम् हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदल गंजनं

मन जाहि राच्यो मिलहि सो वर सहज सुन्दर सांवरो

करुणा निधान सुजान शील स्नेह जानत रावरो

एहि भांति गौरी असीस सुन सिय सहित हिय हरषित अली

तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मन्दिर चली

सोरठा

जानी गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि

मंजुल मंगल मूल वाम अङ्ग फरकन लगे

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यह स्तुति है या आरती?
यह दीप के साथ की जाने वाली पारंपरिक आरती नहीं, बल्कि स्तुति (प्रशंसा का भजन) है। यह राम पूजा में सामान्यतः पाठित होती है।

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