देवताओं के कोषाध्यक्ष, धन के स्वामी
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श्री कुबेर जी आरती (Shri Kuber Ji Aarti)- ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे , स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे। शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे॥ ऊँ..॥
Shri Kuber Chalisa (श्री कुबेर चालीसा)- जैसे अटल हिमालय और जैसे अडिग सुमेर । ऐसे ही स्वर्ग द्वार पै, अविचल खड़े कुबेर ॥
kuber mantra: मनुजवाह्य विमानवरस्थितं गुरुडरत्नानिभं निधिनाकम।, ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये, ॐ वैश्रवणाय स्वाहा: ।