किष्किन्धाकाण्ड · 10

सीताजी की खोज के लिए बंदरों का प्रस्थान

किष्किन्धाकाण्ड का प्रकरण 10: सीताजी की खोज के लिए बंदरों का प्रस्थान। गोस्वामी तुलसीदास के मूल पद।

व्हाट्सऐपटेलीग्राम

दोहा · 21

एहि बिधि होत बतकही आए बानर जूथ। नाना बरन सकल दिसि देखिअ कीस बरूथ॥21॥

चौपाई · 1

बानर कटक उमा मैं देखा। सो मूरुख जो करन चह लेखा॥ आइ राम पद नावहिं माथा। निरखि बदनु सब होहिं सनाथा॥1॥

चौपाई · 2

अस कपि एक न सेना माहीं। राम कुसल जेहि पूछी नाहीं॥ यह कछु नहिं प्रभु कइ अधिकाई। बिस्वरूप ब्यापक रघुराई॥2॥

चौपाई · 3

ठाढ़े जहँ तहँ आयसु पाई। कह सुग्रीव सबहि समुझाई॥ राम काजु अरु मोर निहोरा। बानर जूथ जाहु चहुँ ओरा॥3॥

चौपाई · 4

जनकसुता कहुँ खोजहु जाई। मास दिवस महँ आएहु भाई॥ अवधि मेटि जो बिनु सुधि पाएँ। आवइ बनिहि सो मोहि मराएँ॥4॥

दोहा · 22

बचन सुनत सब बानर जहँ तहँ चले तुरंत। तब सुग्रीवँ बोलाए अंगद नल हनुमंत॥22॥

चौपाई · 1

सुनहु नील अंगद हनुमाना। जामवंत मतिधीर सुजाना॥ सकल सुभट मिलि दच्छिन जाहू। सीता सुधि पूँछेहु सब काहू॥1॥

चौपाई · 2

मन क्रम बचन सो जतन बिचारेहु। रामचंद्र कर काजु सँवारेहु॥ भानु पीठि सेइअ उर आगी। स्वामिहि सर्ब भाव छल त्यागी॥2॥

चौपाई · 3

तजि माया सेइअ परलोका। मिटहिं सकल भवसंभव सोका॥ देह धरे कर यह फलु भाई। भजिअ राम सब काम बिहाई॥3॥

चौपाई · 4

सोइ गुनग्य सोई बड़भागी। जो रघुबीर चरन अनुरागी॥ आयसु मागि चरन सिरु नाई। चले हरषि सुमिरत रघुराई॥4॥

चौपाई · 5

पाछें पवन तनय सिरु नावा। जानि काज प्रभु निकट बोलावा॥ परसा सीस सरोरुह पानी। करमुद्रिका दीन्हि जन जानी॥5॥

चौपाई · 6

बहु प्रकार सीतहि समुझाएहु। कहि बल बिरह बेगि तुम्ह आएहु॥ हनुमत जन्म सुफल करि माना। चलेउ हृदयँ धरि कृपानिधाना॥6॥

चौपाई · 7

जद्यपि प्रभु जानत सब बाता। राजनीति राखत सुरत्राता॥7॥

दोहा · 23

चले सकल बन खोजत सरिता सर गिरि खोह। राम काज लयलीन मन बिसरा तन कर छोह॥23॥

व्हाट्सऐपटेलीग्राम

गोस्वामी तुलसीदास के मूल पद।