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इंदिरा एकादशी कथा — यमपुरी में नारद
आश्विन कृष्ण एकादशी: राजा इंद्रसेन दशमी श्राद्ध और इस व्रत से पिता को यम-पीड़ा से मुक्त करते हैं।

इंदिरा पितृ काल में पड़ती है। कथा यमपुरी से जीवित पुत्र तक पहुँचा संदेश है।
नारद घूमते यमपुरी में राजा इंद्रसेन के पिता को यातना में देख महिष्मती संदेश लाए: दशमी श्राद्ध के बाद कुटुंब सहित आश्विन कृष्ण एकादशी रखो, फल पितर को दो।
राजा ने उस दशमी भूमि पर शयन किया, एकादशी व्रत रखा, द्वादशी पर योग्य को भोजन दिया। पिता की पीड़ा समाप्त हुई। कथा पिंडदान के पास बैठती है: पितर के नाम जीवित को अन्न भी एक तर्पण है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- यदि दशमी श्राद्ध संभव न हो तो?
- एकादशी रखें, जल से स्वच्छ नामार्पण करें, किसी भूखे को सात्विक अन्न दें। स्थानीय रीति और जोड़ सकती है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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