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vishnu · stories

वरुथिनी एकादशी कथा — वैशाख कृष्ण का कवच

वैशाख कृष्ण एकादशी, महाभारत धारा में नामित: वह व्रत जो सौभाग्य को उतरने से बचाता है।

देव चित्र
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स

वरुथिनी अर्थात् कवच-सी घेरने वाली। कथा लंबे कथानक से अधिक यह चेतावनी है कि असावधानी से लक्ष्मी न उतरे।

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कृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि वैशाख कृष्ण एकादशी — स्थिर जिह्वा और पराये धन पर आघात बिना — उतरी इज्जत लौटाती है। जिन्होंने व्रत की हँसी उड़ाई उनके कोष हल्के हुए; जो बैठे उन्हें प्रतिष्ठा का दूसरा अवसर मिला।

गृह पाठ व्यावहारिक है: इस दिन क्रूर सौदा न लिखें; थोड़ा दें; तेल-अहंकार बिना सोएँ। यहाँ कवच संयम है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या वरुथिनी महाभारत में है?
एकादशी माहात्म्य प्रायः बाद के पौराणिक ग्रंथों में कृष्ण–युधिष्ठिर संवाद हैं। इन्हें व्रत-कथा मानें, महाभारत की आलोचनात्मक संस्करण नहीं।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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