hanuman · aarti

हनुमान आरती — आरती कीजै हनुमान लला की

भगवान राम के परम भक्त, दुष्टदलन और रक्षक हनुमान की स्तुति में भक्तिपूर्ण आरती।

हनुमान की मूर्ति
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स (बजरंगबली)

हनुमान आरती मंगलवार और शनिवार को, या हनुमान चालीसा के बाद करें। सिंदूर अर्पित करें और श्रद्धा से दीप जलाएँ।

हनुमान की छवि के समक्ष आरती की थाली लेकर खड़े हों। कोरस वाले छंदों में ताली बजाएँ या घंटी बजाएँ।

आरती के बोल

आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्टदलन रघुनाथ कला की

जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग-दोष जाके निकट न झांके

अंजनि पुत्र महाबलदायी, संतान के प्रभु सदा सहाई

दे बीरा रघुनाथ पठाए, लंका जारी सिया सुध लाए

लंका सो कोट समुद्र सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई

लंका जारी असुर संहारे, सियारामजी के काज संवारे

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे, आणि संजीवन प्राण उबारे

पैठी पताल तोरि जमकारे, अहिरावण की भुजा उखाड़े

बाएं भुजा असुर दल मारे, दाहिने भुजा संतजन तारे

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे, जै जै जै हनुमान उचारे

कंचन थार कपूर लौ छाई, आरती करत अंजना माई

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई, तुलसीदास प्रभु कीरति गाई

जो हनुमानजी की आरती गावै, बसी बैकुंठ परमपद पावै

आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्टदलन रघुनाथ कला की

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या हनुमान चालीसा के बाद हनुमान आरती गाई जा सकती है?
हाँ, पहले हनुमान चालीसा का पाठ और फिर हनुमान आरती करना सामान्य प्रथा है।

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