shiva · aarti

शिव आरती — जय शिव ओंकारा

भगवान शिव की स्तुति में क्लासिक आरती, ओंकार स्वरूप त्रिलोकेश्वर की महिमा।

ऋषिकेश में भगवान शिव की मूर्ति
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स (भगवान शिव, पुम्दीकोट, नेपाल)

शिव आरती सोमवार, महाशिवरात्रि या दैनिक शिव पूजा के बाद करें। बिल्वपत्र अर्पित करें और कपूर का दीप जलाएँ।

शिवलिंग या चित्र के समक्ष आरती की थाली लेकर खड़े हों। घंटी बजाएँ और प्रत्येक छंद को श्रद्धा से गाएँ।

आरती के बोल

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा

एकानन चतुरानन पंचानन राजे

हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी

त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी

श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी

सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका

प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा

पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा

भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला

शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी

नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे

कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिव आरती के लिए कौन सा दिन सर्वोत्तम है?
सोमवार शिव पूजा और आरती के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

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