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छठ पूजा विधि — सूर्य को चार दिनों का अर्घ्य
चार दिवसीय छठ गाइड: नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य — शुद्धि, सूप अर्पण, तथा घाट या छत का अनुशासन।
समय: चार दिवसीय व्रत

छठ सूर्य और छठी मईया को समर्पित शुद्धि और तप का व्रत है, विशेषकर कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर। व्रत का हृदय जल में खड़े होकर सूर्यास्त और सूर्योदय पर अर्घ्य देना है।
सामग्री
- बाँस का सूप, ठेकुआ, मौसमी फल और गन्ना
- अर्घ्य हेतु स्वच्छ जलकलश; नए या धुले वस्त्र
- परिवार परंपरा अनुसार हल्दी, और सुहागिन व्रती हेतु सिंदूर
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
पूजा के चरण
- 1
दिन 1 — नहाय-खाय
स्नान करें, रसोई स्वच्छ करें, और पवित्र स्नान के बाद सात्विक भोजन बनाएँ। वही बना भोजन ग्रहण करें। व्रत रसोई से क्रोध और बासी अन्न दूर रखें।
- 2
दिन 2 — खरना
दिन भर व्रत रखें। संध्या में परिवार परंपरा अनुसार बिना नमक खीर-रोटी बनाएँ। सूर्य को अर्पित कर वही प्रसाद ग्रहण करें और निर्जला अवधि आरंभ करें।
- 3
दिन 3 — संध्या अर्घ्य
स्वच्छ नदी, तालाब या छत के जलपात्र तक सूप ले जाएँ। अस्त सूर्य की ओर खड़े हों। जल, फल और ठेकुआ अर्पित करें — मन छठी मईया पर रहे।
- 4
दिन 4 — उषा अर्घ्य और पारण
उषा से पहले उगते सूर्य को अर्घ्य दें। अर्पण के बाद प्रसाद बाँटें और कोमलता से पारण करें। अर्पण बिखेरकर न छोड़ें; श्रद्धा से घर ले आएँ।
मंत्र
ॐ सूर्याय नमः। ॐ छठी मईया नमः।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- नदी न हो तो क्या छत पर छठ हो सकता है?
- हाँ। सूर्य की ओर खुला स्वच्छ जलपात्र प्रचलित है। रसोई, वाणी और समय की वही शुद्धि रखें।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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