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नाग पंचमी पूजा विधि — श्रावण शुक्ल पंचमी
श्रावण शुक्ल पंचमी पर नाग देवता और शिव की गृह पूजा: दूध, हल्दी, अंकुरित अनाज और नाग गायत्री।
समय: 30–50 मिनट

नाग पंचमी उन सर्प रक्षकों का सम्मान है जो शिव के संग विराजते हैं। यह दिन रक्षा, जीवों के प्रति विनम्रता, और परिवार परंपरा में कालसर्प या राहु–केतु के भय से शांति हेतु रखा जाता है।
सामग्री
- नाग चित्र, मिट्टी की आकृति, या सर्प चिह्न सहित शिवलिंग
- दूध, हल्दी, सिंदूर और अंकुरित अनाज
- खीर या लड्डू; सर्पों को हानि न पहुँचाएँ
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
पूजा के चरण
- 1
नाग अंकित या विराजित करें
स्वच्छ भूमि या पाटे पर हल्दी से सरल नाग बनाएँ या चित्र रखें। शिव पास रखें। परिवार मना करता हो तो उस दिन भूमि न खोदें और वृक्ष न काटें।
- 2
दूध और अनाज अर्पित करें
दूध, पुष्प और अंकुरित अनाज अर्पित करें। जंगली बिलों में ऐसा दूध न डालें जिससे जीव पीड़ित हों। अर्पण प्रार्थना है, तमाशा नहीं।
- 3
जप और शिव स्मरण
सकें तो नाग गायत्री या ॐ नागदेवाय नमः एक सौ आठ बार जपें। शिव को बेलपत्र अर्पित करें। घर जानता हो तो नाग चालीसा पढ़ें।
- 4
आरती और करुणा
संक्षिप्त आरती करें। मिष्ट प्रसाद बाँटें। सर्पों पर कटु वचन न कहें; व्रत जीवन के सम्मान का है।
मंत्र
ॐ नागदेवाय नमः। ॐ भुजंगेशाय विद्महे सर्पराजाय धीमहि तन्नो नागः प्रचोदयात्॥
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या दीमक की बाँबी में दूध डालना आवश्यक है?
- चित्र से गृह पूजा पर्याप्त है। बाहर अर्पण ऐसा न हो जिससे जीव या मनुष्य संकट में पड़ें।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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