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संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि — मासिक कृष्ण पक्ष गणेश व्रत
पूर्णिमा के बाद मासिक चतुर्थी: चंद्रोदय पारण, 108 ॐ गं गणपतये नमः, चालीसा और व्रत कथा।
समय: संध्या से चंद्रोदय

संकष्टी कृष्ण चतुर्थी का मासिक गणेश व्रत है। मंगलवार पड़े तो विकट संकष्टी विशेष प्रिय मानी जाती है। व्रत प्रायः चंद्रोदय के बाद टूटता है।
सामग्री
- गणेश मूर्ति, दूर्वा और मोदक या लड्डू
- लाल या पीला वस्त्र, घी दीप
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
पूजा के चरण
- 1
दिन का व्रत
स्वास्थ्य हो तो फल या निर्जला व्रत रखें। संध्या स्नान कर गणेश विराजित करें।
- 2
पूजा और 108 जप
घी दीप जलाएँ। विषम संख्या में दूर्वा अर्पित करें। ॐ गं गणपतये नमः 108 बार जपें। गणेश चालीसा और उस मास की व्रत कथा पढ़ें।
- 3
चंद्रोदय पारण
चंद्र दिखे तो अर्घ्य दें, गणेश आरती करें, व्रत तोड़ें। बादल छिपाएँ तो उचित प्रतीक्षा के बाद उसी प्रार्थना से पारण करें।
मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- यह गणेश चतुर्थी से कैसे भिन्न है?
- गणेश चतुर्थी वार्षिक शुक्ल चतुर्थी महापर्व है। संकष्टी प्रत्येक चांद्र मास कृष्ण चतुर्थी को लौटती है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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