मुख्य सामग्री पर जाएँ

guru · puja-vidhi

शिक्षक दिवस पूजा विधि — गुरु का सम्मान

5 सितंबर को जीवित शिक्षक और गुरु-तत्त्व हेतु बैठक: पुस्तक, पीला वस्त्र, और गुरुर्ब्रह्मा श्लोक।

समय: 20–30 मिनट

पूजा वेदी का चित्र
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स

भारत में शिक्षक दिवस डॉ. राधाकृष्णन का स्मरण है, और उनके पीछे यह पुरा सत्य कि गुरु पूज्य हैं। पुस्तक या शिक्षक का चित्र रखकर धन्यवाद अर्पित करें।

सामग्री

  • शिक्षक का चित्र या पवित्र ग्रंथ (गीता, वेद अंश)
  • पीला या श्वेत वस्त्र, फल और दीप
  • स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
  • धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
व्हाट्सऐपटेलीग्राम

पूजा के चरण

  1. 1

    ज्ञान विराजित करें

    पीला या श्वेत वस्त्र बिछाएँ। ग्रंथ या चित्र रखें। पूर्व मुख बैठें।

  2. 2

    अर्पण और पाठ

    पुष्प, तिलक और दीप अर्पित करें। गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः पढ़ें। गुरु मंत्र जपें। किसी जीवित शिक्षक का नाम लेकर धन्यवाद दें।

  3. 3

    सेवा का कर्म

    पूजा संदेश, भेंट, या जरूरतमंद विद्यार्थी की सहायता से पूरी होती है — केवल फूलों से नहीं।

मंत्र

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

व्हाट्सऐपटेलीग्राम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यह गुरु पूर्णिमा के समान है?
भाव सजातीय है; पंचांग भिन्न है। गुरु पूर्णिमा आषाढ़ की पूर्णिमा है। दोनों दिनों ये मंत्र चल सकते हैं।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

संबंधित लेख

गुरु बृहस्पति, देवगुरु
gurumantra

गुरु मंत्र

Guru Vandna | GURU BRAHMA GURU VISHNU GURU DEVO MAHESHWARA | गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

और पढ़ें
बृहस्पति, देवगुरु
brihaspatiaarti

बृहस्पति देव आरती

Brihaspati-Dev-Aarti (बृहस्पति देव की आरती)- Brihaspati Dev Aarti in Hindi 'Om Jai Brihaspati Deva': ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा

और पढ़ें
देवी सरस्वती की मूर्ति
saraswatiaarti

सरस्वती आरती

Saraswati Aarti (सरस्वती आरती)- जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥ॐ..॥

और पढ़ें
देवी सरस्वती की मूर्ति
saraswatichalisa

सरस्वती चालीसा

Shri Saraswati Chalisa (श्री सरस्वती चालीसा)- जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥

और पढ़ें
देवी गायत्री
gayatrimantra

गायत्री मंत्र

Gayatri Mantra: ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात् || oṃ bhūr bhuvaḥ svaḥ tat saviturvareṇyaṃ

और पढ़ें
गुरु की मूर्ति
gurubhajan

हे प्रभु आनंद-दाता — प्रातः ज्ञान प्रार्थना

कक्षा और घर की प्रार्थना जो ज्ञान, स्वच्छ वाणी और गुरु-सेवा माँगती है — उषा और गुरु पूर्णिमा पर गाई जाती है।

और पढ़ें
पूजा वेदी का चित्र
rampuja-vidhi

अखंड रामायण पाठ विधि — अविरल गृह पाठ

परिवार अखंड रामचरितमानस या रामायण पाठ कैसे रखते हैं: पाली, वेदी नियम, समापन आरती और छोटा हवन।

और पढ़ें