tulsi · puja-vidhi
तुलसी पूजा विधि — पवित्र तुलसी की दैनिक और शुक्रवार आराधना
तुलसी पौधे की पूजा कैसे करें: जड़ में जल, परिक्रमा, दीप, और यह स्मरण कि बिना दल के विष्णु अर्पण अधूरा माना जाता है।
समय: 15–25 मिनट

तुलसी हरिप्रिया और लक्ष्मी का स्वरूप कही जाती हैं। शुक्रवार और कार्तिक संध्या विशेष प्रिय हैं। स्वच्छ आँगन का जीवित पौधा ही सच्ची मूर्ति है।
सामग्री
- जीवित तुलसी का पौधा
- जल, दीप, और ऐसा पुष्प जो झाड़ी को हानि न पहुँचाए
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
पूजा के चरण
- 1
जड़ सींचें
प्रातः जड़ में जल दें — इतना नहीं कि तना सड़े। सूखे पत्र सावधानी से हटाएँ।
- 2
दीप और प्रदक्षिणा
संध्या में छोटा दीप जलाएँ, विशेषकर शुक्रवार। दक्षिणावर्त परिक्रमा करें। जानते हों तो तुलसी आरती पढ़ें।
- 3
विष्णु हेतु दल
विष्णु को नैवेद्य दें तो पौधा दे सके तो तुलसी दल रखें। कठोरता से न तोड़ें।
मंत्र
ॐ तुलस्यै नमः
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या बालकनी के गमले की पूजा हो?
- हाँ। आँगन से अधिक सूर्य, स्वच्छ जल और दैनिक स्मरण मायने रखते हैं।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
संबंधित लेख

तुलसी आरती
Shri Tulsi Aarti | Shri Tulsi Aarti Lyrics In Hindi | जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता।
और पढ़ें
तुलसी चालीसा
Shri Tulsi Chalisa | Shri Tulsi Chalisa Ke Lyrics Hindi | जय जय तुलसी भगवती,सत्यवती सुखदानी।
और पढ़ें
विष्णु आरती
Shri Vishnu Aarti (श्री विष्णु आरती )- ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥ॐ..॥
और पढ़ें
विष्णु पूजा विधि — गुरुवार गृह पूजा
विष्णु को प्रसन्न करने की गुरुवार विधि: तुलसी, पीला वस्त्र, सात्विक नैवेद्य और नारायण मंत्र।
और पढ़ें
लक्ष्मी आरती — ॐ जय लक्ष्मी माता
माता लक्ष्मी की स्तुति में गाई जाने वाली प्रिय आरती, धन, समृद्धि और शुभ आशीर्वाद की दाता।
और पढ़ें
शुक्रवार लक्ष्मी और संतोषी माता पूजा विधि
गृह शुक्रवार व्रत: उषा स्नान, लक्ष्मी या संतोषी संकल्प, गुड़-चने का भोग, व्रत कथा और आरती।
और पढ़ें
अखंड रामायण पाठ विधि — अविरल गृह पाठ
परिवार अखंड रामचरितमानस या रामायण पाठ कैसे रखते हैं: पाली, वेदी नियम, समापन आरती और छोटा हवन।
और पढ़ें