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parvati · stories

करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती और मिथ्या चंद्र

वीरावती की गृह कथा, जिसके भाइयों ने दीप को चंद्र दिखाया — और सच्चे चंद्रोदय तक व्रत पूरा करने से पति कैसे लौटा।

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चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर अर्घ्य से पहले यह कथा सुनते हैं। शिक्षा है: प्रेम व्रत को छल नहीं सकता — उसे पूरा ही कर सकता है।

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प्रिये पुत्री वीरावती के सात भाई करवा चौथ पर उसकी भूख नहीं देख सके। संध्या जब लंबी लगी, उन्होंने दीप जलाकर छलनी से ढका और चंद्र कहा। उसने अर्घ्य देकर ग्रास लिया। पहले ग्रास में बाल, दूसरे में कंकड़; फिर समाचार आया कि पति अत्यंत रुग्ण है।

प्रायश्चित्त का मार्ग

माता ने पति के पास विदा किया — मार्ग में जो सुहाग चिह्न मिले उसे प्रणाम करना। उसने वृद्धा का सम्मान किया, एक आशीष ली, अंत में गौरी को नमन किया। देवी ने कहा: मिथ्या चंद्र से व्रत टूटा। अगली चतुर्थी बिना जल्दबाजी रखो; सच्चे उदय की प्रतीक्षा करो।

वीरावती पूर्ण निर्जला बैठी। जब चंद्र सचमुच उगा, छलनी से जल दिया, पति को देखा, रोग हटा। भाई रोए और सीखे: व्रत छोटा करने वाला स्नेह घाव बनता है। दूसरी प्रचलित कथा तुंगभद्रा पर करवा के कच्चे धागे से मगरमच्छ बाँधने की है — वही शिक्षा कि पत्नी का सत्य यम के आगे खड़ा रहता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पारण से पहले कथा सुनना आवश्यक है?
पारंपरिक घर पहले सुनते हैं, फिर चंद्र अर्घ्य देते हैं। अकेले हों तो दीप के संग संक्षिप्त कथा पढ़ें।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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