parvati · stories
करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती और मिथ्या चंद्र
वीरावती की गृह कथा, जिसके भाइयों ने दीप को चंद्र दिखाया — और सच्चे चंद्रोदय तक व्रत पूरा करने से पति कैसे लौटा।

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर अर्घ्य से पहले यह कथा सुनते हैं। शिक्षा है: प्रेम व्रत को छल नहीं सकता — उसे पूरा ही कर सकता है।
प्रिये पुत्री वीरावती के सात भाई करवा चौथ पर उसकी भूख नहीं देख सके। संध्या जब लंबी लगी, उन्होंने दीप जलाकर छलनी से ढका और चंद्र कहा। उसने अर्घ्य देकर ग्रास लिया। पहले ग्रास में बाल, दूसरे में कंकड़; फिर समाचार आया कि पति अत्यंत रुग्ण है।
प्रायश्चित्त का मार्ग
माता ने पति के पास विदा किया — मार्ग में जो सुहाग चिह्न मिले उसे प्रणाम करना। उसने वृद्धा का सम्मान किया, एक आशीष ली, अंत में गौरी को नमन किया। देवी ने कहा: मिथ्या चंद्र से व्रत टूटा। अगली चतुर्थी बिना जल्दबाजी रखो; सच्चे उदय की प्रतीक्षा करो।
वीरावती पूर्ण निर्जला बैठी। जब चंद्र सचमुच उगा, छलनी से जल दिया, पति को देखा, रोग हटा। भाई रोए और सीखे: व्रत छोटा करने वाला स्नेह घाव बनता है। दूसरी प्रचलित कथा तुंगभद्रा पर करवा के कच्चे धागे से मगरमच्छ बाँधने की है — वही शिक्षा कि पत्नी का सत्य यम के आगे खड़ा रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या पारण से पहले कथा सुनना आवश्यक है?
- पारंपरिक घर पहले सुनते हैं, फिर चंद्र अर्घ्य देते हैं। अकेले हों तो दीप के संग संक्षिप्त कथा पढ़ें।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
संबंधित लेख

करवा चौथ पूजा विधि — चंद्रोदय तक निर्जला व्रत
विवाहित स्त्रियों हेतु कार्तिक कृष्ण चतुर्थी गाइड: सरगी, दिवस व्रत, गौरी पूजा, और पारण से पूर्व चंद्र अर्घ्य।
और पढ़ें
पार्वती आरती
Parvati Aarti (पार्वती आरती)- जय पार्वती माता ,जय पार्वती माता । ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता ॥ॐ..॥
और पढ़ें
पार्वती चालीसा
Parvati Chalisa (पार्वती चालीसा) : जय गिरी तनये दक्षजे शम्भू प्रिये गुणखानि। गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवानि॥
और पढ़ें
दुर्गा आरती — जय अम्बे गौरी
देवी अम्बे गौरी की स्तुति में क्लासिक दुर्गा आरती, दुष्टों का संहार करने वाली और आशीर्वाद देने वाली दिव्य माता।
और पढ़ें
वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
स्कन्द पुराण की सावित्री कथा, जिन्होंने यम के पीछे चलकर सत्यवान का जीवन लौटाया — अखंड सौभाग्य हेतु वट-वृक्ष व्रत की कथा।
और पढ़ें
अक्षय तृतीया कथा — वह दिन जब पुण्य नहीं घटता
वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय क्यों: अन्नपूर्णा का अन्न, कुछ स्मृतियों में गंगा अवतरण, और वह दान जिसे संग्रह नहीं करना।
और पढ़ें
आमलकी एकादशी कथा — आँवला वृक्ष और विष्णु
फाल्गुन शुक्ल एकादशी: आँवला विष्णु के संग क्यों पूजा जाता है, और तुलसी से व्रत कैसे पूरा होता है।
और पढ़ें