parvati · stories
वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
स्कन्द पुराण की सावित्री कथा, जिन्होंने यम के पीछे चलकर सत्यवान का जीवन लौटाया — अखंड सौभाग्य हेतु वट-वृक्ष व्रत की कथा।

जब सनत्कुमार ने शिव से ऐसा व्रत पूछा जो स्त्रियों को अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य दे, तब शिव ने वट के नीचे सावित्री की कथा कही।
मद्र देश में धर्मात्मा राजा अश्वपति राज्य करते थे। वेदज्ञ होकर भी वे संतान-सुख से रहित थे। राजा-रानी ने देवी सावित्री की जप-हवन से आराधना की, तब माँ ने दुर्लभ बुद्धि वाली कन्या दी। नाम सावित्री रखा गया।
सत्यवान का चुनाव
सयानी होकर सावित्री ने अंधे वनवासी राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को चुना। नारद ने चेताया कि युवक एक वर्ष में प्राण त्यागेगा। सावित्री नहीं मुड़ी। विवाह किया, सास-श्वसुर की सेवा की, और शांत मन से दिन गिने।
यम के पीछे पदचाप
निर्धारित दिन व्रत रखकर वह सत्यवान के संग काष्ठ लेने गई, और उसके मूर्छित होने पर बैठी। जब यम सूक्ष्म शरीर ले चले, सावित्री पीछे चली। उसने धर्म ऐसा सत्य कहा कि मृत्यु ने वर दिए: द्युमत्सेन को दृष्टि और राज्य, वंश को सौ पुत्र — और अंत में सत्यवान का जीवन। वे वट की छाया लौटे; भय का वर्ष कर्तव्य का जीवन बना।
शिव ने सनत्कुमार से कहा कि जो स्त्रियाँ वट पर धागा, दीप और इस कथा से व्रत करती हैं, वे दीर्घायु सहचर और अटूट घर माँगती हैं। वृक्ष साक्षी है, सौदा नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- वट सावित्री कब रखते हैं?
- कई क्षेत्र ज्येष्ठ अमावस्या रखते हैं, कुछ ज्येष्ठ पूर्णिमा। कुल पंचांग अपनाएँ; सकें तो वट के नीचे या उसकी ओर बैठें।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
संबंधित लेख

पार्वती आरती
Parvati Aarti (पार्वती आरती)- जय पार्वती माता ,जय पार्वती माता । ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता ॥ॐ..॥
और पढ़ें
पार्वती चालीसा
Parvati Chalisa (पार्वती चालीसा) : जय गिरी तनये दक्षजे शम्भू प्रिये गुणखानि। गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवानि॥
और पढ़ें
शिव आरती — जय शिव ओंकारा
भगवान शिव की स्तुति में क्लासिक आरती, ओंकार स्वरूप त्रिलोकेश्वर की महिमा।
और पढ़ें
करवा चौथ पूजा विधि — चंद्रोदय तक निर्जला व्रत
विवाहित स्त्रियों हेतु कार्तिक कृष्ण चतुर्थी गाइड: सरगी, दिवस व्रत, गौरी पूजा, और पारण से पूर्व चंद्र अर्घ्य।
और पढ़ें
करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती और मिथ्या चंद्र
वीरावती की गृह कथा, जिसके भाइयों ने दीप को चंद्र दिखाया — और सच्चे चंद्रोदय तक व्रत पूरा करने से पति कैसे लौटा।
और पढ़ें
अक्षय तृतीया कथा — वह दिन जब पुण्य नहीं घटता
वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय क्यों: अन्नपूर्णा का अन्न, कुछ स्मृतियों में गंगा अवतरण, और वह दान जिसे संग्रह नहीं करना।
और पढ़ें
आमलकी एकादशी कथा — आँवला वृक्ष और विष्णु
फाल्गुन शुक्ल एकादशी: आँवला विष्णु के संग क्यों पूजा जाता है, और तुलसी से व्रत कैसे पूरा होता है।
और पढ़ें