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मोक्षदा एकादशी कथा — राजा वैखानस का स्वप्न
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी: राजा स्वप्न में पिता को यातना में देखता है, और व्रत का पुण्य पितर को मुक्त करता है।

मोक्षदा गीता जयंती काल खोलती है। इसकी कथा पीड़ित पितर की ओर पुण्य अर्पण की है।
गोकुल में वैखानस राज्य करता, प्रजा को पुत्रवत पालता। एक रात्रि उसने पिता को कर्म-लोक में जलते देखा। मुनि ने कहा: कुटुंब सहित मार्गशीर्ष एकादशी रखो, फल पिता के नाम अर्पित करो।
राजा ने व्रत बैठा, विष्णु नाम सुने, पुण्य अर्पित किया। पिता मुक्त होकर पुत्र को आशीष दे स्वच्छतर गगन की ओर गए। इसीलिए परिवार मोक्षदा पर पितर का नाम अभी भी फुसफुसाते हैं — स्वर्ग खरीदने को नहीं, विस्मरण से इनकार को।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या फल जीवित माता-पिता को अर्पित हो?
- शास्त्रीय कथन दिवंगत पिता हेतु है। उस दिन जीवित माता-पिता पर कोमलता व्यर्थ नहीं जाती।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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