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निर्जला एकादशी कथा — भीम और व्यास
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी: व्यास ने भीम को एक निर्जल व्रत कैसे दिया जो वर्ष की एकादशियों के तुल्य कहा गया।

भीम प्रत्येक एकादशी भूखे नहीं रख सके। व्यास ने एक उग्र करुणा दी: निर्जला — स्वास्थ्य हो तो।
युधिष्ठिर के भाइयों ने चांद्र एकादशी रखी। भीम, जिसकी भूख कथा थी, व्यास से ऐसा मार्ग पूछा जो व्रत का उपहास न हो। मुनि ने ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी कही: न अन्न न जल, शरीर सहे तो आचमन का घूँट भी नहीं — फिर द्वादशी पर सावधानी से पारण।
भीम ने एक बार पूर्ण हृदय से रखा। कथा रुग्ण से पांडव की अग्नि नकल नहीं करवाती। कहती है: एक एकादशी ही सुंदर रख सको तो इसे सत्य से रखो — या वर्ष भर कोमल एकादशी रखो। विष्णु पेट के सत्य को ग्रहण करते हैं, प्यास के नाटक को नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या निर्जला सबके लिए जल-रहित है?
- नहीं। वृद्ध, बालक और अस्वस्थ फल या जल व्रत रख सकते हैं। कथा छत है, शस्त्र नहीं।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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