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सत्यनारायण कथा — सत्य व्रत के पाँच अध्याय
स्कन्द पुराण की गृहस्थ कथा: लकड़हारा, व्यापारी, राजा, और कथा अधूरी न छोड़ने की चेतावनी।

सत्यनारायण सत्य के रक्षक विष्णु हैं। यह कथा पूजा के बाद शीरा प्रतीक्षा में सुनते हैं, ताकि संकल्प मुख से पहले कान में उतरे।
नारद ने ब्रह्मा से कलियुग का सरल व्रत पूछा जो शोक उठाए। उत्तर सत्यनारायण पूजा था: कलश, केला, शीरा, और वह कथा जो अंतिम शब्द तक सुननी है। विष्णु ने इसे ऐसा मार्ग बताया जिसे राजपुरोहित की आवश्यकता नहीं।
लकड़हारा और व्यापारी
एक दरिद्र लकड़हारे ने सत्यनारायण बैठक देखी, जो था अर्पित किया, बोझ हल्का और घर कम भूखा पाया। व्यापारी — क्षेत्रीय नाम साधु आदि — यात्रा सफल हो तो पूजा का वचन देकर कथा टालता रहा। पोत रुके, कुटुंब दुखा, जब तक वचन पूरा न हुआ। अध्याय की धार विलंब है, दरिद्रता नहीं।
वह राजा जिसने कथा बिना स्वाद लिया
एक राजा, रसोई पर गर्वी, प्रसाद खाकर कथावाचकों को विदा कर दिया। वंश में भ्रम आया जब तक वह प्रत्येक अध्याय न बैठा। अंतिम शिक्षा शिष्टता है: सत्य को वाक्य के मध्य न छोड़ो। कलिकाल, ग्रंथ कहता है, अब भी यह द्वार खोलता है — पूर्णिमा, संक्रांति, या कोई निभाया वचन।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- कितने अध्याय पढ़ें?
- प्रचलित गृह पाठ पाँच अध्याय का है। समय कम हो तो पूर्ण संक्षिप्त कथा सुनें — अध्याय के मध्य न रुकें।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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