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दीर्घायु पूजा विधि — दीर्घ और उपयोगी जीवन हेतु पूजा
दीर्घायु हेतु गृह कर्म: महामृत्युंजय जप, वैकल्पिक सोमवार रुद्राभिषेक, तथा सूर्य या विष्णु स्मरण।
समय: 35–55 मिनट

दीर्घायु केवल वर्ष नहीं — वे वर्ष जो अभी सेवा कर सकें। शिव मंत्र, सूर्य हेतु दीप, और पूर्णिमा पर सत्यनारायण परिचित साथी हैं।
सामग्री
- शिवलिंग या चित्र, बेलपत्र, रुद्राक्ष माला
- फल, दूध, और अर्घ्य जोड़ें तो उषा का सूर्य दीप
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
पूजा के चरण
- 1
उषा या सोमवार बैठक
पूर्व मुख बैठें। शिव को जल अर्पित करें। जिस स्वास्थ्य की प्रार्थना है उसका नाम कहें।
- 2
महामृत्युंजय
11 या 108 बार जपें। शरीर सक्षम हो तो सोमवार रुद्राभिषेक या तिल-घी का छोटा अर्पण हो सकता है।
- 3
आरती से समापन
शिव आरती करें। व्यक्ति उपस्थित हो तो प्रसाद पहले उन्हें दें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या यह औषधि का स्थान ले सकता है?
- नहीं। यह उपचार के संग चलता है। चिकित्सा विलंब भक्ति नहीं।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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