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मास में दो बार

प्रदोष व्रत

शिव–पार्वती की त्रयोदशी संध्या — छोटी सायंकाल व्रत।

प्रदोष त्रयोदशी की संध्या है, शिव–पार्वती को प्रिय। दंपती प्रायः साथ बैठते हैं। रात्रि छोटी हो तो हल्का व्रत, बेलपत्र और शिव आरती पर्याप्त हैं।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

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इस त्योहार के लिए पाठ

पूजा वेदी का चित्र
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संतान प्राप्ति शिव पूजा — शिव परिवार की आराधना

सोमवार को शिव के संग पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की पूजा; प्रदोष स्मरण; तथा यह याद कि चिकित्सकीय सलाह पहले है।

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भगवान शिव की मूर्ति या लिंग
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शिव पूजा विधि — घर पर सरल अभिषेक

सोमवार, श्रावण या दैनिक स्मरण हेतु जल, बेलपत्र और आरती के साथ शिव पूजा की कोमल चरणबद्ध विधि।

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पूजा वेदी का चित्र
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रुद्राभिषेक पूजा विधि — शिवलिंग का अभिषेक

घर पर रुद्राभिषेक कैसे करें: गणेश आरंभ, पंचामृत धारा, बेलपत्र और ॐ नमः शिवाय।

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ऋषिकेश में भगवान शिव की मूर्ति
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शिव आरती — जय शिव ओंकारा

भगवान शिव की स्तुति में क्लासिक आरती, ओंकार स्वरूप त्रिलोकेश्वर की महिमा।

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देवी पार्वती गणेश और शिव के साथ
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पार्वती आरती

Parvati Aarti (पार्वती आरती)- जय पार्वती माता ,जय पार्वती माता । ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता ॥ॐ..॥

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पूजा वेदी का चित्र
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महाशिवरात्रि पूजा विधि — रात्रि शिव आराधना

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की विधि: चार प्रहर अभिषेक, बेलपत्र, ॐ नमः शिवाय, और शांत जागरण।

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देव चित्र
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प्रदोष व्रत कथा — वह संध्या जिसने जीवन घुमाया

पारंपरिक प्रदोष कथा: दरिद्रता, मंदिर की संध्या, शिव–पार्वती की कृपा, और राजकुमार की बाद की विजय जिसे व्रत-फल कहा गया।

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