shiva · puja-vidhi
महाशिवरात्रि पूजा विधि — रात्रि शिव आराधना
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की विधि: चार प्रहर अभिषेक, बेलपत्र, ॐ नमः शिवाय, और शांत जागरण।
समय: रात्रि जागरण, 4–8 घंटे

महाशिवरात्रि शिव–पार्वती के पावन योग और जागरण की निस्तब्ध रात्रि का स्मरण है। सकें तो व्रत रखें, वाणी कोमल रखें, और चार प्रहर शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करें।
सामग्री
- शिवलिंग या चित्र, बेलपत्र और श्वेत पुष्प
- दूध, जल, मधु; भांग केवल यदि कुल परंपरा सचमुच हो — बच्चों के लिए कभी नहीं
- रुद्राक्ष हो तो धारण करें; पारण हेतु फल
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
पूजा के चरण
- 1
स्नान और संकल्प
स्वच्छ वस्त्र पहनें। उत्तर या पूर्व मुख बैठें। शिव–पार्वती के स्मरण की रात्रि का संकल्प लें — स्पष्टता, सहचर्य और जल्दबाजी से मुक्ति हेतु।
- 2
चार प्रहर अभिषेक
प्रत्येक प्रहर जल या दूध, बेलपत्र और पंचाक्षरी अर्पित करें। पत्रों की संख्या कुल परंपरा अनुसार — प्रायः विषम — रखें; निषेध हो तो लिंग के शीर्ष को अशुद्ध ढंग से न ढकें।
- 3
जप और मौन
ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय जपें। प्रहरों के बीच मौन बैठें। रात्रि जागरण की है, विवाद की नहीं।
- 4
उषा आरती और पारण
शिव आरती करें, क्षमा माँगें, अंतिम अर्पण के बाद पारण करें। बिना जल्दबाजी प्रसाद बाँटें।
मंत्र
ॐ नमः शिवाय। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या गृहस्थ रात्रि का कुछ भाग सो सकते हैं?
- पूर्ण जागरण श्रेष्ठ है। कार्य या स्वास्थ्य आराम माँगे तो चार संक्षिप्त अभिषेक और सच्चा जप रखें — वही शिवरात्रि है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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