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महाशिवरात्रि कथा — विवाह रात्रि और व्याध का जागरण
फाल्गुन चतुर्दशी महा रात्रि क्यों: शिव–पार्वती विवाह, और वह व्याध जिसने अंधेरे में बेलपत्र गिराए।

इस रात्रि दो स्मृतियाँ हैं — प्रभु का विवाह, और भयभीत व्याध जिसका अनजाना अर्पण जागरण बना। दोनों जागे मन की माँग करते हैं।
पुराण की एक धारा इस चतुर्दशी को वह रात्रि कहती है जब शिव ने पार्वती को ग्रहण किया — तप पूर्ण, पर्वत-पुत्री प्रभु की निश्चल अर्धांगिनी। घर चार प्रहर ऐसे रखते हैं मानो ऐसा विवाह सजा रहे जो उषा पर समाप्त न हो।
बेलवृक्ष पर व्याध
दूसरी धारा एक व्याध की है जो पशुओं से भागकर छिपे लिंग के ऊपर बेल पर चढ़ा। रात भर पत्र तोड़े जो अर्पण बनकर गिरे; वह भय से जागा, भक्ति से नहीं। उषा पर अनजाना जागरण स्वीकार हुआ। शिक्षा यह नहीं कि असावधानी पूजा है — यह कि रात्रि स्वयं द्वार है, और भयभीत हृदय भी कृपा का माध्यम बन सकता है यदि भागे नहीं।
दोनों कथन साथ कहते हैं: निश्चलता को बल से ब्याहो, और वर्ष में एक रात्रि ऐसी रखो जब जल्दबाजी को बोलने न दो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- घर कौन सी कथा पढ़े?
- कोई एक, या दोनों। विवाह कथा दंपती के अनुकूल; व्याध कथा उसके लिए जो थकी रात्रि ही दे सके।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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