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गुरु पूर्णिमा पूजा विधि — आषाढ़ पूर्णिमा कृतज्ञता
गुरु हेतु आषाढ़ पूर्णिमा विधि: पादुका या चित्र, पीला अर्पण, और गुरु स्तोत्र।
समय: 30–45 मिनट

गुरु पूर्णिमा व्यास और प्रत्येक उस शिक्षक का सम्मान है जो जीवित परंपरा सौंपता है। पादुका, चित्र, या जिस ग्रंथ ने आपको बदला उसके समक्ष बैठें।
सामग्री
- गुरु चित्र, पादुका, या प्रिय शास्त्र
- पीले पुष्प, फल, और ईमान से दी जा सकने वाली दक्षिणा
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
पूजा के चरण
- 1
आसन के आगे नमन
गुरु का आसन अपने से ऊँचा रखें। जल, पुष्प और दीप अर्पित करें। गुरुर्ब्रह्मा श्लोक पढ़ें।
- 2
श्रवण या पाठ
गुरु का प्रिय पृष्ठ पढ़ें, या मौन बैठें। दक्षिणा वैकल्पिक है और घर को न दबाये।
- 3
आरती
सरल आरती करें। जीवित गुरु न हों तो जगद्गुरु कृष्ण को यही बैठक अर्पित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या विद्यार्थी विद्यालय में यह रख सकते हैं?
- कक्षा में दीप वर्जित हो सकता है। मौन नमस्कार और लिखा धन्यवाद भी दिन पूरा करते हैं।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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