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guru · puja-vidhi

गुरु पूर्णिमा पूजा विधि — आषाढ़ पूर्णिमा कृतज्ञता

गुरु हेतु आषाढ़ पूर्णिमा विधि: पादुका या चित्र, पीला अर्पण, और गुरु स्तोत्र।

समय: 30–45 मिनट

पूजा वेदी का चित्र
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स

गुरु पूर्णिमा व्यास और प्रत्येक उस शिक्षक का सम्मान है जो जीवित परंपरा सौंपता है। पादुका, चित्र, या जिस ग्रंथ ने आपको बदला उसके समक्ष बैठें।

सामग्री

  • गुरु चित्र, पादुका, या प्रिय शास्त्र
  • पीले पुष्प, फल, और ईमान से दी जा सकने वाली दक्षिणा
  • स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
  • धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
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पूजा के चरण

  1. 1

    आसन के आगे नमन

    गुरु का आसन अपने से ऊँचा रखें। जल, पुष्प और दीप अर्पित करें। गुरुर्ब्रह्मा श्लोक पढ़ें।

  2. 2

    श्रवण या पाठ

    गुरु का प्रिय पृष्ठ पढ़ें, या मौन बैठें। दक्षिणा वैकल्पिक है और घर को न दबाये।

  3. 3

    आरती

    सरल आरती करें। जीवित गुरु न हों तो जगद्गुरु कृष्ण को यही बैठक अर्पित करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या विद्यार्थी विद्यालय में यह रख सकते हैं?
कक्षा में दीप वर्जित हो सकता है। मौन नमस्कार और लिखा धन्यवाद भी दिन पूरा करते हैं।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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